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About Yugtevar युगतेवर

आधुनिक युग को ज्ञान विज्ञानं के विभिन्न अनुशासनों में नये - नये विचारों के उदय और उनके बीच वाद- प्रतिवाद-संवाद के युग के रूप में जाना जाता है |
वाद- प्रतिवाद और संवाद की  इस प्रक्रिया से  साहित्य भी अछूता नहीं है | बल्कि यह कहा जा सकता है कि  इस प्रक्रिया में साहित्य की अंतर्वस्तु और उनकी भासिक निर्मितियों को विविधता और विस्तार मिला है | युग तेवर सार्थक सृजन का साझा मंच है जो साहित्य, संस्कृति , कला और सामाजिक - राजनितिक छेत्र में रोज-ब-रोज होने वाले परिवर्तनों के कारण दिन प्रतिदिन आकर लेने वाली नयी विचार सारणियों और मौलिक शोध कार्यों को पाठकों तक पहुंचाने को प्रतिबद्ध है और इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन सभी अध्येताओं विचारकों और शोधार्थियों के  सर्जनात्मक योगदान का स्वागत करती है |
बाजार और मीडिया के सर्वग्रासी षड्यंत्र के इस दौर में जब मनुष्य को उसके संस्कृति मूल्यों, परंपरा के स्वस्थ प्रतिमानों यहाँ तक कि  उसकी भाषिक  संस्कृति  तक , विवेक और कल्पनाशीलता से काटने के निरंतर प्रयास हो रहे हैं , यह पत्रिका उन सारी चीजों  को बचा लेने के लिए प्रत्नशील और प्रतिबद्ध है , जो मनुष्य और मनुष्यता के लिए मूल्यवान है |